Saturday, February 13, 2010

आल इज़ स्टिल वेल- इजिप्ट में एक्सिडेंट


मुसाफ़िर हूं यारों.. ना घर है ना ठिकाना,
मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना....

जीवन की इस सच्चाई से रूबरू हुआं हूं अभी अभी... जी हां.

पिछले रविवार को अचानक इजिप्ट की राजधानी काइरो या अल-काहिरा जाना पडा, प्रोजेक्ट के सिलसिले में. अब तो आना जाना लगा ही रहेगा, और एक मुसाफ़िर की तरह मैं बस्ती बस्ती पर्बत पर्बत गाते हुए बंजारे की तरह निकल पडा़.

मगर क्या मालूम था कि किस्मत में कुछ यूं भी लिखा है, कि आप पीछे मुड कर देखें कि जीवन कितना प्रेशियस या कीमती है.सुएज़ शहर से काईरो आते हुए गाडी का ज़बरदस्त एक्सिडेंट हो गया और आपका ये मित्र बच गया. याने बॊटम लाईन यही है कि आल इस स्टिल वेल!!!

हुआ यूं कि इजिप्ट के एक बडे शहर सुएज़ के पास हमारी साईट है, जहां एक फ़ेक्टरी बन रही है, जिसमें मैं वेयरहाऊस इंजीनीरिंग के एक भाग के निर्माण प्रक्रिया के लिये गया हुआ था.सुएज़ शहर सुएज़ केनाल या नहर के लिये विश्व विख्यात है.यहीं से एक मानव निर्मित नहर से बडे बडे जहाज़ रेड समुद्र से मेडिटेरियन समुद्र जाते हैं, और भारत से एक सीधा रास्ता युरोप के लिये खुल जाता है, बजाय साऊथ अफ़्रिका से होकर गुज़रने के.

बात अभी पिछले बुधवार की है.साईट से लौट कर सुएज़ केनाल देखने हम सुएज़ शहर में घुसे, और लौटने लगे काहिरा की ओर, ताकि शाम तक हम काहिरा पहुंच जायें , जहां हम होटल में रुके थे. मेरे साथ कंपनी गेलेक्सी के एक प्रोजेक्ट इंजिनीयर इंचार्ज अविनाश भी थे.

सुएज़ से काहिरा का हाई वे 130 KM का ६ लेन है और इतना बढियां है, कि हर कोई १४०-१६० की स्पीड से गाडी चलाता है.

ज़ाहिर है, शहर छोडते ही ड्राईवह एहमद नें 160 KM/Hr की गति पकड ली, और अगली सीट पर बैठे बैठे मुझे ठंड में भी पसीने छूटने लगे.इसके पहिले पहली बार जब अबु धाबी से दुबई गया था तो 140 की स्पीड अनुभव की थी. मगर सच कहूं, मैंने घबरा कर एहमद से स्पीड कम करने को कहा. उसने थोडी कम ज़रूर की, मगर अचानक सामने एक आर्मी का ट्रक जो जा रहा था उसे कट मारने में चूक हो गयी.पैर ब्रेक की जगह एक्सीलरेटर पर पड गया और हम धडाम से उस ट्रक में घुस गये.

एक ज़ोरदार टक्कर हुई जिससे हमारी गाडी उछल कर ट्रक के पिछवाडे में अटक कर आधा कीलोमीटर घसीटता चला गया. भगवान की कृपा ही समझो, आगे की सीट पर बैठे होने के बावजूद, सीट बेल्ट पहनने की वजह से मुझे उस इम्पॆक्ट का असर कम लगा. मैं उस क्षण से कुछ ही सेकंद पहिले विडियो शूटिंग कर रहा था अपने छोटे केमेरे से, तो थोडा मानसिक रूप से रिफ़्लेक्स की वजह से मैने अपने शरीर को उस आघात के लिये तैयार कर लिया, मगर पीछे बैठे मेरे मित्र अविनाश चूंकि सीट बेल्ट नहीं पहने थे, और थोडा सुस्ता रहे थे, एकदम से अपने आप को सम्हाल नहीं पाये और उन्हे थॊदी ज़्यादह चोट आये. ड्राईवर एहमद के तो पंजे में फ़्रेक्चर हो गया, और सर में चोट आयी.

चूंकि गाडी को ज़्याद क्षति पहुंची और गेट भी जाम हो गये, आर्मी के जवानों ने आनन फ़ानन में हमें गाडी से उठाया. दर्द या शॊक का एहसास भी कुछ मिनीट नही रहा, और जैसे कि हम फ़िल्म देखते हैं , या सपना, मैं अपने आपको और दूसरों को गाडी में से निकालने की मशक्कत को एक त्रयस्थ याने तीसरे शख्स़ की नज़रिये से देख रहा था.

बस , किसी तरह से काहिरा से दूसरी कार मंगवाई, सूरज डूबने चला था.फ़िज़ा में ठंडक और घुलने लगी थी. हम इंदौर से लाये स्वादिष्ट नमकीन खाते हुए, अंदरूनी दर्द के बढते हुए एहसासात लिये हुए काहिरा के एक अस्पताल के लिये रवाना हुए..

संक्षेप में, जिसको राखे सांई, मार सके ना कोई. थोडा़ एक फ़ुट ज़्यादा हो जाता तो कुछ भी हो सकता था. चलो , जान बची ,लाखों पाये. अब आप से फ़िर रू ब रू होते रहेंगे.इंशा अल्लाह!!

इंशा अल्लाह. ताऊ की पहेलीयां बूझेंगे, अल्पना जी के गाने और कवितायें सुनेंगे, लावण्या दीदी के संस्मरण, समीर जी की सिगरेट की पन्नी में लिखी हुई जीवन की सच्चाईयां, अनुराग जी के होस्टल के किस्से, अनुराग शर्माजी के पोडकास्ट, मनीष कुमार के और आवाज़ के सजीव सारथी और सुजॊय के संगीतमय पोस्टें, राज भाटिया जी के जोक्स, यूनुस भाई के मधुर और अनोखे गीत लोकगीत,और जिसका इंतज़ार रहता है.. संजय भाई के संस्मरण और OLD MONK के सारगर्भित कमेंट्स का.. तो फ़िर से अविरत चलते रहेंगे.

आखिर सच ही तो कहा है कि - मुसाफ़िर हूं यारों, ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना...

तो देखिये , उस मंज़र की कुछ झलकियां , जो आपके लिये, अगर समय निकाल सकें तो..




ये पंक्तियां लिखते लिखते समाचार मिला कि पुणे में ओशो अश्रम के पार जर्मन बेकरी में एक आतंकवादी विस्फ़ोट हुआ. मैंने ताबड़तोब पुने फ़ोन लगाया , क्यों कि मेरी पत्नी, बेटी नुपूर और बेटा अमोघ इन दिनों वहीं हैं. पता चला वे कुशल हैं, लेकिन उस समय वे वहां से केवल आधा किलोमीटर दूरी पर थे.

ALL IS STILL WELL!!

14 comments:

संगीता पुरी said...

गाडी का ये हाल .. शुक्र है खुदा का !!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

गाडी की हालत देखकर ही दर लग रहा है. शुक्र है भगवान् का, आप ठीक हैं. बाक़ी दोनों लोगों के क्या हाल हैं अब?

Prateek said...

That looks like a hell of an accident! But I feel the best way to measure a company's health is its bottom line. As you've put it yourself,"the bottom line is that all is still well." I hope it stays that way.

Udan Tashtari said...

बाप रे, भगवान का लाख लाख शुक्र है कि सब सलामत है.

आशा करते हैं आपके दोनों सहयात्री भी अब तक ठीक हो गये होंगे.

ईश्वर बुरी नज़र से बचाये रखे हमारे मित्र को.

अल्पना वर्मा said...

अंत भला तो सब भला .
यह वीडियो मेरे ख्याल से सब को देखनी चाहीए..बड़ा भारी एक्सीडेंट हुआ था यह तो!
-गाड़ीका बुरा हाल है.
गाड़ी कौन सी थी?मर्सीडीज़ होगी...
--टकराए भी तो आर्मी वालों की गाड़ी से!इसीलिए रात को [फिर भी समय से ]अस्पताल पहुँच गये नहीं तो ना जाने कितनी और देर होती वहाँ..
आप के मित्र ,उस ड्राइवर और आप की चोटें जल्द भर जाएँ,जल्द स्वस्थ हों,ऐसी शुभकामनाएँ हैं.
--------------------------------------------
***१४० की स्पीड तो आम बात ही है अबू धाबी -दुबई-[यू.ए.ई] के हाइवेस में..१५० -१६० की स्पीड पर भी अगर गाड़ी बढ़िया हो तो मालूम नहीं चलता की गाड़ी इतनी स्पीड से जा रही है.[unless you open car window!]
-----------
आप का गाना भी सुना ..बहुत ही सही चुना है..:)...aur बहुत ही बढ़िया डॉक्युमेंटरी bhi बना दी है.

अविनाश वाचस्पति said...

गाड़ी को विनम्र श्रद्धांजलि
और
आपको मंगलकामनायें।

आपको अभी हमारी बहुत सारी
पोस्‍टें और टिप्‍पणियां झेलनी हैं
इसलिए आप इसी इंटरनेटभू
स्‍पेस
जो भी मानते हों
पर हमारे बीच ही बने रहेंगे।

मैं नहीं तो मेरा हमनाम ही सही
पर साथ तो था ही
मुझे महसूस हो रहा है
मैं साथ था आपके
बिल्‍कुल निडर

Old Monk said...

"Muddai Lakh Bura Kahe To Kya Hota Hai, Wohin Hota Hai Jo Munzoor E Khuda Hota Hai".
We all will of course say:
Jaan Bachi Lakhon Paye, Laut Ke Buddhu Ghar Ko Aaye.
It was indeed a "Great Escape" in the Operation "Desert Storm". Your taking the might of the Egyptian Army "Head On", was really courageous.
The song video was superb. It is admirable, really hats off, that you have preserved yr artistic instincts, even in the face of such a horrific situation.
As far as Neha's presence so close to the disaster site is concerned, let us keep complete silence. After all you have braved the fire (at close quarters), for over 26 long years (and survived). How can you expect a poor bakery to have such perseverance. "Nashte Ka Khayal Rahe".
We MUST celebrate this good luck with a grand party. Now you have truly become a Dvij. Even great Cleopatra couldn't afford to displease Neha, when it came to claiming yr affection. She had to be content with poor Julius and Mark. Let us raise a toast and sing "Aal Izz Well".

ताऊ रामपुरिया said...

भगवान का लाख लाख शुक्र है जो इतने खतरनाक एक्सीडेंट के बाद भी आप सही सलामत हैं. आपके होंसले की भी दाद देनी पडेगी. अब आप इंदौर कब पहुंच रहे हैं. मैं तो संडे को आपका इंतजार करता ही रह गया.

रामराम.

अजित वडनेरकर said...

प्रभु की कृपा रही आप तीनों पर, वर्ना कुछ भी हो सकता था। ज्यादा तेज रफ्तार ठीक नहीं।

असीम शुभकामनाएं।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

शुभकामनाएं.

Ulook said...

वाकई में जाके राखो सांईया !

Manju Gupta said...

पुनर्जन्म हुआ है ,सभी की दुआएं आप सब के साथ हैं .

नितिन | Nitin Vyas said...

शुभकामनायें।

सजीव सारथी said...

all izz well, and janaab all will be well forever, हमारी दुवायें खुदा यूँहीं अनसुनी कैसे कर सकता है भला.....

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